एंडोमेट्रियोसिस एक आम समस्या है जो महिलाओं में देखी गई है ! इसको समझने के लिए हमे पहले गर्भाशय की बनावट को समझना पड़ेगा ! महिलाओं के गर्भाशय पर एक प्रकार की परत (वाल) पाई जाती है जिसे एंडोमेट्रियम कहा जाता है ! लेकिन जब यह लाइनिंग यूट्रस के ऊपर वाली परत पर बनाने लग जाये जैसे ओवरीज़, ट्यूब्स या आंतो पर तो इसे एंडोमेट्रियोसिस कहा जाता है ! यह स्थिति महिलाओं में पीरियड साइकिल को प्रभावित करती है और कई बार तेज़ दर्द का भी सामना करना पड़ता है ! इसके कारण महिलाओं को माँ बनने में भी समस्या आती है ! आइये, हम आर्टिकल के जरिये बिलकुल आसान भाषा में इस समस्या को समझेंगे एवं इसका निवारण भी जानेगे ताकि समय रहते इस पर काबू पा सके !
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Toggleएंडोमेट्रियोसिस को कैसे पहचाने ?
हर महिला में एंडोमेट्रिओसिस के लक्षण अलग अलग हो सकते है ! कुछ में हलके लक्षण देखे गए है तो कुछ में इसका दर्द बर्दाश्त के बाहर होता है ! आइये हम इसके लक्षण को जानते है !
- जब महिलाओ में माहवारी(पीरियड्स) के शुरू होने के पहले या बादमे असहनीय दर्द होना ! यह दर्द महिला के कमर और पेट के निचले हिस्से तक महसूस किया जा सकता है !
- पीरियड्स में हैवी ब्लीडिंग का होना या इसके दौरान सिर्फ स्पॉटिंग या धब्बा दिखना !
- सेक्सुअल इंटरकोर्स या सम्बन्ध बनाते समय दर्द होना एंडोमेट्रियोसिस का एक आम लक्षण है।
- पीरियड्स के दौरान पेशाब करने में दर्द या जलन एवं मल त्याग करने में दर्द और समस्या होना
अगर आप भी ऐसे कुछ लक्षणों का सामना कर रही है तो इसे नज़रअंदाज़ ना करे और अपने डॉक्टर से सलाह ले !
एंडोमेट्रियोसिस के कारण :
अगर हम बात करे के एंडोमेट्रिओसिस क्यों होता है? तो इस बात का कोई सटीक जवाब नहीं है परन्तु डॉक्टर एंडोमेट्रिओसिस के लिए कुछ कारणों को ज़िम्मेदार मानते है!
हार्मोनल बदलाव : कई बार महिलाओ में एस्ट्रोजन हॉर्मोन ज़्यादा बढ़ जाता है जो की तकलीफो को बढ़ा सकता है ! हॉर्मोन में बदलाव के कारण भ्रूण कोशिकाएं एंडोमेट्रियल जैसी कोशिकाओं में बदल सकती हैं।
उल्टा रक्त प्रवाह (Retrograde Menstruation): इसमें पीरियड्स (मासिक धर्म) का खून सामान्य रूप से शरीर से बाहर निकलने के बजाय, फेलोपियन ट्यूब के रास्ते वापस पेट और पेल्विस (पेड़ू) के हिस्से में चला जाता है। यही खून बाद में एंडोमेट्रियोसिस का रूप ले लेता है।
जेनेटिक कारण : अगर यह समस्या पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है जैसे माँ बहन या नानी को यह समस्या है तो कई हद्द तक आप में भी एंडोमेट्रियोसिस होने का खतरा बढ़ सकता है !
इम्यून सिस्टम की कमज़ोरी: सामान्य तौर पर, अगर शरीर में कोई भी चीज अपनी सही जगह पर न हो, तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) उसे तुरंत नष्ट कर देती है। लेकिन इस बीमारी में यह सिस्टम सही से काम नहीं कर पाता। वह गर्भाशय से बाहर बढ़ रहे इन टिश्यूज को पहचानकर खत्म करने में नाकाम रहता है, जिससे इन्हें शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलने और बढ़ने का पूरा मौका मिल जाता है।
एंडोमेट्रियोसिस का उपचार
अगर आप एंडोमेट्रियोसिस का उपचार ढूंढ़ना चाहते है तो पहले यह जानना होगा के आपकी तकलीफ कितनी ज़्यादा है और दूसरा, क्या आप भविष्य में मां बनना चाहती हैं? ट्रीटमेंट चालू होने के पहले डॉक्टर दर्द काम करने की दवाई एवं हार्मोनल पिल्स देते है ताकि बीमारी पर काबू पाया जा सके ! अगर फिर भी आराम ना आये तो डॉक्टर आपको लैप्रोस्कोपी (दूरबीन वाले ऑपरेशन ) के लिए सलाह देते है जिससे टिश्यू हटाया जा सके।
एंडोमेट्रियोसिस और निसंतानता
एंडोमेट्रियोसिस महिलाओ में प्रजनन क्षमता यानी फर्टिलिटी को बाधित कर सकती है ! अमेरिकन सोसायटी फॉर रिप्रोडक्टिव मेडिसिन (ASRM) के शोध के अनुसार, जिन महिलाओ का गर्भ ठहर नही पाता उनमे 30 % से 40 % महिलाओ को एंडोमेट्रिओसिस हो सकता है ! इस बीमारी में जब टिश्यू बढ़ते है तब या तो फॉलोपियन ट्यूब्स को बंद कर देते है या ओवरी को बाधित करते है जिसके कारण सोयरंस और एग्स मिल नहीं पाते ! कई बार इस बीमारी के कारण सूजन भी आ जाती है जिसके चक्क्ते गर्भ नहीं ठहर पाता ! इस स्तिथि के चलते कई महिलाओ के पेल्विक एरिया में सूजन हो जाती है, जिसके कारण प्रजनन क्षमता एफेक्ट होती है ! लेकिन चिंता की बात नहीं है क्यूंकि, टेस्ट ट्यूब या आईविऍफ़ जैसी तकनीकें एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं को भी माँ बन ने का अवसर प्रदान करती है!
एंडोमेट्रियोसिस से कैसे बचा जा सकता है ?
यह एक सबसे बड़ा ध्यान देने वाला विषय है एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्या से कैसे बचा जाएँ ताकि हर महिला माँ बनने का सुख भोग पाए ! तो आइये किन बातो क्या ध्यान रखे जिससे इस समस्या से बचा जा सकता है !
- हॉर्मोनल संतुलन : संतुलित आहार और नियमित व्यायाम हमारे शरीर में होर्मोनेस का संतुलन बनाये रखते है ! इसलिए हमे ध्यान रखना है के खाने में हमारी बैलेंस्ड डाइट हो!
- पीरियड्स हाइजीन : महिलाओ को मासिक धर्म के समय साफ़ सफाई और सही आदतों का पालन करना आवश्यक है क्युकी इसको नज़रअंदाज़ करने से कई बीमारियाँ फ़ैल सकती है !
- समय समय पर डॉक्टर से हेल्थ चेकउप करवाते रहे ताकि एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्या का समय पर इलाज ले सके !
निष्कर्ष
एंडोमेट्रियोसिस सिर्फ एक शारीरिक बीमारी नहीं है बल्कि यह एक महिला को मानसिक और भावनात्मक रूप से भी झंजोड़ कर रख देती है। हर महीने में होने वाला वह असहनीय दर्द और अनिश्चितता मन को परेशान कर देती है। लेकिन यकीन मानिए, आप इस लड़ाई में अकेली नहीं हैं और इससे जीता जा सकता है। अगर सही समय पर इसकी पहचान हो जाए, तो सही इलाज और थोड़े से सपोर्ट से इसे पूरी तरह काबू में किया जा सकता है। अगर आपके पेट के निचले हिस्से में अक्सर दर्द रहता है या पीरियड्स खुलकर नहीं आते, तो इसे ‘मामूली दर्द’ समझकर नजरअंदाज न करें। यदि आप इस प्रकार का दर्द महसूस कर रही है तो इसे अनदेखा ना करे और आज ही किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करें ! याद रखें, खुद से प्यार करने और सेहतमंद रहने का पहला कदम है—सही जानकारी और समय पर लिया गया फैसला।